नाटो क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? नाटो के सदस्य देश कौन कौन हैं

नाटो(NATO) एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन है l जब से रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया है, तब से नाटो के बारे में हर जगह चर्चा हो रही है l लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे भी है जिन्हे नाटो के बारे में कुछ भी पता नहीं है जैसे कि NATO kya hai, नाटो का क्या काम है और रूस और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध से नाटो का क्या लेना देना है, अगर आप भी उन लोगों में से एक हो और नाटो के बारे में जानना चाहते हो तो हमारा यह लेख आपके लिए है। हम आपको हमारे इस लेख NATO kya hai में बताने वाले हैं, नाटो क्या है, NATO ki full form क्या है इसे कब बनाया गया , इसे किसने बनाया है, और इसे बनाने के पीछे के क्या कारण थे l वर्तमान में इसकी इंपॉर्टेंस कितनी है l इन सारी बातों के बारे में हम आपको पूरी जानकारी देंगे l पूरी जानकारी लेने के लिए हमारे इस आर्टिकल को लास्ट तक जरूर पढ़ेंl तो चलिए अब हम समय के महत्व को ध्यान में रखते हुए शुरू करते हैं आज का हमारा यह लेख और आपको बताते हैं NATO kya hai in hindi के बारे में विस्तार से।

Contents

नाटो क्या है / What is NATO in Hindi / NATO Kya Hai / NATO Meaning in Hindi

नाटो अमेरिका और यूरोप के देशों के बीच का एक सैन्य गठबंधन है l यह गठबंधन सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर कार्य करता है l सामूहिक रक्षा के सिद्धांत का अर्थ होता है कि अगर नाटो के 30 सदस्यों में से किसी पर भी कोई अन्य देश आक्रमण करता है तो यह आक्रमण इन सभी 30 देशों पर आक्रमण माना जाएगा और उसके बदले में यह 30 देश मिलकर उस देश पर आक्रमण करने को स्वतंत्र होते हैं l नाटो एक तरीके से एक देश की अन्य देशों से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है उदाहरण के तौर पर अगर यूक्रेन जैसे और भी किसी छोटे देशों पर कोई बड़ी कंट्री हमला करती है तो फिर नाटो के 30 सदस्य गुट बनाकर उन पर आक्रमण करेंगे यह अमेरिका और यूरोप के देशों की रक्षा करने के लिए बनाया गया एक सैनिक गुट है जो कि अपने सदस्य देशों को बाहरी हमलो से सुरक्षित रखता है।

NATO Ka Full Form in Hindi / नाटो का पूरा नाम क्या है

NATO kya hai यह जानने के बाद आपको यह भी पता होना चाहिए कि NATO ki full form kya hai तो हम आपको बता दें नाटो की फुल फॉर्म नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन है। अगर हम बात करें हिंदी में नाटो की फुल फॉर्म की तो वह उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन है जोकि कई देशों से मिलकर बना हुआ है। अब हम आपको नाटो के सभी सदस्य देश के बारे में बताने वाले हैं इसके अलावा नाटो की स्थापना के बारे में भी हम चर्चा करेंगे।

नाटो की स्थापना कब हुई और इसके सदस्य देश कौन कौन से हैं? / NATO Members

NATO kya hai और NATO ki full form जानने के बाद आपको यह जानना जरूरी है कि इसकी स्थापना कब हुई थी, तो हम आपको बता दें नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन ( नाटो) को 4 अप्रैल 1949 में बनाया गया थाl इसकी स्थापना के समय इसमें 12 सदस्य थे l जिनके नाम इस प्रकार हैं –

● फ्रांस
● बेल्जियम
● लक्जमबर्ग
● ब्रिटेन
● नीदरलैंड
● कनाडा
● डेनमार्क
● आइसलैंड
● इटली
● नार्वे
● पुर्तगाल
● संयुक्त राज्य अमेरिका

नोट अटलांटिक संधि संगठन की स्थापना वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में की गई थीl

नाटो एक अंतर सरकारी सैनिक संगठन हैl नाटो का मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में हैl जैसा की अभी हमने आपको बताया की स्थापना के समय में नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन में 12 सदस्य थे परंतु बाद में इस संगठन में धीरे धीरे और बहुत सारे देश जुड़ते चले गए, वर्तमान में इसमें 30 सदस्य हैंl

नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन के वर्तमान के सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं –

● अल्बानिया
● बेल्जियम
● बुलगारिया
● कनाडा
● क्रोएशिया
● चेक गणराज्य
● डेनमार्क
● एस्तोनिया
● फ्रांस
● जर्मनी
● यूनान
● हंगरी
● आईसलैंड
● इटली
● लाटविया
● लिथुआनिया
● लक्जमबर्ग
● नीदरलैंड
● नॉर्वे
● पोलैंड
● पुर्तगाल
● रोमानिया
● स्लोवाकिया
● स्लोवेनिया
● स्पेन
● तुर्की
● यूनाइटेड किंग्डम
● संयुक्त राज्य अमेरिका
● मेसिडोनिया
● मोंटेनीग्रो

2017 में मोंटेनीग्रो और 2020 में मेसिडोनिया नाटो के सदस्य बनने वाले सबसे नए देश हैं l

नाटो के वर्तमान महासचिव का नाम जेंट्स स्टोल्टनबर्ग है l

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी कि नाटो में कोई भी फैसला किस प्रकार लिया जाता है?

जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि NATO एक सैनिक महागठबंधन है. इसमें कोई भी निर्णय चाहे वह किसी भी प्रकार का निर्णय क्यों ना हो वह 30 के 30 सदस्यों की सामूहिक इच्छा के आधार पर ही लिया जाता है l अगर कोई भी सदस्य देश असहमति प्रकट करता है तो वह निर्णय नहीं हो पाता है l

नाटो की स्थापना के उद्देश्य क्या क्या है?

  • 4 अप्रैल 1949 को जब नाटो की स्थापना की गई तब इसका सबसे प्रमुख उद्देश्य पश्चिम यूरोप में सोवियत संघ जो कि वर्तमान का रूस है, उसकी साम्यवादी विचारधारा को रोकना था l क्योंकि यूरोप के देश लोकतांत्रिक थे और वह साम्यवादी विचारधारा से डरे हुए थे. जिसको देखते हुए यह गठबंधन प्रभाव में आयाl
  • इसका दूसरा उद्देश्य राजनीतिक और सैनिक तरीकों से अपने मेंबर कंट्रीज की सुरक्षा और स्वतंत्रता की गारंटी प्रदान करनाl
  • नाटो के सदस्य देशों के बीच एकजुटता और सामंजस्य की भावना पैदा करना भी इसका उद्देश्य हैl
  • इसके अलावा नाटो का मुख्य उद्देश्य यह है कि वह अपने मेंबर देशों की सभी प्रकार से रक्षा करें और मुसीबत के समय में उनके संकटों को कम करने का प्रयास करेंl
  • इसके अलावा नाटो का उद्देश्य यह है कि वह अपने सभी सदस्य देशों को आतंकवाद से दूर रखें और पूरी दुनिया में शांति बनाकर रखेंl
  • इसके अतिरिक्त नाटो का उद्देश्य यह है कि यूरोप में लोकतंत्र , व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानव अधिकार एवं कानून का शासन स्थापित करने में सदस्य देशों की सहायता करना और पूरे क्षेत्र में शांति को सुनिश्चित करनाl
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न हुई समस्याओं का समाधान करने में सदस्य देशों की सहायता करना यह भी नाटो का एक प्रमुख उद्देश्य हैl

नाटो की स्थापना का ऐतिहासिक कारण क्या है? / NATO Ki Sthapna

जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद पूरी दुनिया 2 ध्रुव में बट गई थी l एक थे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी सदस्य देशों का ध्रुव और दूसरा ध्रुव था सोवियत संघ की तरफl

संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी देश लोकतंत्र के पक्षधर थे जबकि सोवियत संघ साम्यवादी सोच पर आधारित थाl विश्व में लोकतंत्र की स्थापना करने के लिए और साम्यवादी सोच से विश्व को दूर रखने के लिए ही संयुक्त राज्य अमेरिका की अगुवाई में 1948 में नाटो की स्थापना की गई थीl परंतु जैसा कि रूस के द्वारा कहा जाता है कि यदि नाटो की स्थापना सोवियत संघ के साम्यवादी विचारों से रक्षा करने के लिए की गई थी तो 1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हो गया और उससे बहुत से देश अलग हो गए तो फिर नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) अभी तक अस्तित्व में क्यों हैl नाटो को भी समाप्त कर दिया जाना चाहिएl

यही एक कारण है जिसकी वजह से रूस और नाटो के सदस्य देशों के बीच में लगातार खींचातानी और तनाव का माहौल देखने को मिल जाता हैl असल बात तो यह है कि सोवियत संघ वर्तमान में रूस है नाटो और इसके सदस्य देशों से खुश नहीं है.

नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के कार्य क्या क्या है?

नाटो की स्थापना के समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि यह संगठन सदस्य राष्ट्रों की हर क्षेत्र में मदद करेगाl आतंकवाद को किसी भी हाल में तथा किसी भी क्षेत्र में यह पनपने नहीं देखा और ना ही किसी को प्रोत्साहित करने देगा l इससे संबंधित ही नाटो के बहुत सारे कार्य हैं. नाटो के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं –

  • नाटो आंतकवाद की प्रॉब्लम को हैंडल करने के साथ-साथ आतंकवादी हमलो के परिणामों का प्रबंधन करने हेतु नई टेक्नोलॉजी और क्षमताओं का विकास करता हैl
  • नाटो का विकास ही लोकतंत्र की रक्षा और साम्यवाद के विरोधी के रूप में हुआ हैl अतः नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन लोकतांत्रिक मूल्य को बढ़ावा देने और मेंबर कंट्री की प्रॉब्लम का सलूशन करने के अलावा मेंबर कंट्री की रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर हेल्प और परामर्श भी देता हैl
  • नाटो के मुख्य कार्यों में सामूहिक सुरक्षा सहकारी सुरक्षा और संकट प्रबंधन शामिल है जिसको वर्तमान अवधारणा के अंतर्गत निर्धारित किया गया हैl
  • नाटो हथियारों के बढ़ते उपयोग पर नियंत्रण और इसका अप्रसार करना ही नाटो का मुख्य कार्य हैl
  • नाटो निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देता हैl
  • अपने मेंबर कंट्री के क्षेत्र में रणनीति के चलते और सामूहिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए सभी संभव कार्य करने कोNATO तत्पर दिखाई पड़ता हैl
  • नाटो सभी प्रकार के मामलों में शांतिपूर्ण तरीके से विवादों को खत्म करने की कोशिश करने के लिए प्रयासरत भी दिखाई पड़ता हैl
  • NATO सभी विवादों को राजनीतिक रूप से हल करने में विश्वास रखता हैl यह इसका एक महत्वपूर्ण कार्य है इससे राजनीतिक सहयोग बढ़ता है और संपूर्ण क्षेत्र में शांति स्थापित हो जाती हैl
  • अन्य कार्यों के साथ-साथ नाटो के मुख्य कार्य में समुद्री सुरक्षा क्षमता का निर्माण भी शामिल हैl
  • इसके अलावा नाटो का अन्य कार्य नेविगेशन की स्वतंत्रता को शुरू करना भी हैl
  • इसके अतिरिक्त नाटो का कार्य या कर्तव्य यह है कि वह इंपॉर्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का डेवलपमेंट का डेवलपमेंट करेगाl

नाटो के द्वारा किए गए प्रमुख कार्य और मिशन –

नाटो का उद्देश्य संपूर्ण क्षेत्र में शांति बनाए रखना हैl अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अभियान और मिशन की एक लंबी श्रृंखला में शामिल रहता हैl अगर वर्तमान की बात की जाए तो यह कोसोवो और भूमध्य सागर में काम कर रहा हैl अफगानिस्तान में नाटो के द्वारा भेजा गया अभियान भी खूब चर्चा में रहा हालांकि अफगानिस्तान का यह अभियान सफल नहीं हो सका लेकिन नाटो के प्रयास भी यहां पर साफ-साफ दिखाई दिए हैंl

नाटो ने अफगानिस्तान में आईएसएएफ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल का संचालन किया और इसके बाद में जनवरी 2015 में संकल्प सहायता मिशन भी प्रारंभ कियाl अफगानिस्तान में नाटो ने संकल्प सहायता मिशन के द्वारा निम्नलिखित कार्य के द्वारा अपना योगदान दिया –

  • योजनाओं को सहमति एवं संवर्धन प्रदान करनाl
  • अफगानिस्तान में बजट प्रोग्रामिंग, जवाबदेही और पारदर्शिता निर्धारित करनाl
  • अफगानिस्तान में कानून के शासन और गुड गवर्नेंस के सिद्धांतों को बढ़ानाl
  • अफगानिस्तान में बल उत्पादनl
  • सेना भर्तीl
  • ट्रेनिंग मैनेजमेंट और कर्मचारियों का विकास करनाl

अफगानिस्तान में 18 साल से यह अशांति का वातावरण चल रहा था इसके लिए 29 फरवरी 2020 को अमेरिका और तालिबान ने शांति के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किया और वहां से अपनी सेना को वापस बुला लियाl

नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन के सामने प्रमुख चुनौतियां क्या है?

जैसा कि आप जानते हैं कि जब से NATO बना है तब से वह किसी ना किसी चुनौती का सामना कर रहा है और वर्तमान में नाटो में शामिल होने की केवल बात के कारण ही और रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दियाl यह एक बड़ी समस्या बनकर उभरा हैl नाटो के सामने आने वाली अन्य प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार है –

  • वर्तमान में पूरे विश्व में आतंकवाद एक जहर की तरह फैलता जा रहा हैl आतंकवाद के खतरे से निपटना नाटो के सामने एक प्रमुख चुनौती बनकर उभरा हैl
  • वर्तमान युग परमाणु हथियारों का युग हैl वर्तमान में परमाणु हथियारों के निर्माण के प्रसार और इससे होने वाले विनाश को रोकना भी नाटो के सामने एक बड़ी चुनौती हैl
  • डेवलपमेंट से रिलेटेड भी नाटो के सामने चुनौती हैl
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के इस युग में साइबर हमला भी एक प्रमुख चुनौती हैl
  • पर्यावरण से संबंधित चुनौतियां का सामना भी नाटकों कितनी ही बार करना पड़ता हैl
  • पर्यावरण से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को भी कम करना इसके सामने एक विशाल चुनौती हैl
  • सैन्य अभियानों के दौरान मनुष्य तस्करी का मुकाबला करना भी नाटो के सामने एक चुनौती बनी रहती हैl

क्या इंडिया नाटो का सदस्य है? / Is India Part of NATO?

वैसे तो भारत बहुत से अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सदस्य है लेकिन भरत नाटो का सदस्य देश नहीं है, क्योंकि जब पूरी दुनिया दो ध्रुवों संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच में विभाजित हो गई थी. तब भी भारत ने दुनिया को एक तीसरा रास्ता गुटनिरपेक्ष आंदोलन के रूप में दिखाया था तब से भारत ना तो रूस और ना ही अमेरिका की तरफ हैl इस कारण भारत नाटो का सदस्य देश नहीं है लेकिन विश्व में भारत की महत्वपूर्ण स्थिति को देखते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने भारत को नाटो का सहयोगी देश का दर्जा देने हेतु एक विधेयक पारित किया हैl अमेरिकी सीनेटर ने हथियार निर्यात नियंत्रण अधिनियम में संशोधन करने की मांग की हैl

हम आपको बता दें कि अमेरिका इससे पहले यह दर्जा दक्षिणी कोरिया और इजराइल को भी दे चुका है l

वर्तमान में नाटो की प्रासंगिकता

नाटो का गठन सोवियत संघ की साम्यवादी नीतियों के विरोध में हुआ था l लेकिन जैसा कि रूस बार-बार प्रश्न उठाता है कि अगर यह साम्यवादी सोच को दूर करने के लिए गठित हुआ था तो सोवियत संघ के विघटन के बाद में इसको नष्ट क्यों नहीं किया गया? वैसा ही सवाल आप सभी के मन में, हमारे मन में भी उठता है लेकिन सभी सवालों के बावजूद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि वर्तमान में नाटो की प्रासंगिकता है l उनमें से कुछ इस प्रकार है l जैसे कि-

  • नाटो के द्वारा अफगानिस्तान में आतंकवाद को खत्म करने के लिए बहुत से मिशन चलाए गएl
  • इराक में नाटो इराक मिशन की स्थापना की गईl
  • यही नहीं बहुत सारे कार्य नाटो के द्वारा लगातार किए जाते रहे हैं जिससे कि इसके मेंबर देशों को सुविधाएं मिलती रहती हैंl
  • नाटो के ज्यादातर सदस्य देश अधिक हथियार नहीं रखते हैंl इसीलिए यह उनके फायदे में है क्योंकि अगर उन पर कोई देश हमला करेगा तो उसे संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विशाल देश से युद्ध करना पड़ेगाl यही कारण है कि नाटो के सदस्य देश इसका विघटन नहीं करना चाहते हैं और लगातार इसका प्रसार होते देखना चाहते हैंl

निष्कर्ष

यह था आज का हमारा लेख NATO kya hai in hindi जिसमें हमने नाटो के बारे में विस्तार से बतायाl नाटो एक ऐसा संगठन है जिसमें 30 से ज्यादा देश शामिल है। NATO के सभी देश एक दूसरे की रक्षा करने के लिए तत्पर रहते है। अगर विश्व का कोई भी देश किसी एक देश पर हमला करता है तो नाटो के सभी देश एकसाथ उन पर वार करते हैं। अगर देखा जाए तो नाटो एक तरीके से विश्व में युद्ध को रोकने और शांति बनाए रखने के लिए हैं।

हमें उम्मीद है कि आज का हमारा यह लेख आपको पसंद आया होगा और इसके अंदर बताएगा ही सभी इंफॉर्मेशन आपको समझ आ गई होगी। अगर अब भी आपके मन में कोई सवाल है तो हम उसके लिए नीचे कुछ FAQ’S दे रहे है।

FAQ’S

1. नाटो की फुल फॉर्म क्या है?

नोटों की फुल फॉर्म नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन है। जिसका हिंदी मतलब होता है उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन.

2. नाटो का गठन कब हुआ?

4 अप्रैल 1949 को नाटो का गठन किया गया। उस समय इसमें केवल 12 देश थे।

3. क्या भारत नाटो का हिस्सा है? / Is India Part of NATO?

नहीं, भारत नाटो का हिस्सा नहीं है वर्तमान में नाटो में 30 सदस्य देश शामिल हैं। जिसमें ज्यादातर डेवलप्ड कंट्री है।

4. वर्तमान में नाटो में कितने देश है?

अभी फिलहाल में नाटो में कुल 30 देश शामिल है।

5. नाटो किस लिए बनाए गए हैं?

संसार में शांति रखने और युद्धों को रोकने के लिए नाटो का गठन किया गया है।

 

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