कुतुब मीनार के बारे में: कुतुब मीनार का इतिहास, Lambai

क़ुतुब मीनार की लम्बाई | Qutub Minar ki lambai | कुतुब मीनार कहां पर है

यदि आप मध्यकालीन इतिहास के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं तो आपको कुतुब मीनार के बारे में जरूर मालूम होगा। इसके अलावा यदि आप देश की राजधानी दिल्ली का भ्रमण करने गए हैं तो यहां पर पर्यटन के लिए कुतुबमीनार भी एक बड़ी ही अच्छी जगह मानी जाती है। यह लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित एक ऊंची मीनार है जिसको यूनेस्को द्वारा सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया गया है।

यदि आप कुतुबमीनार के बारे में पूरी जानकारी लेना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके बहुत ही काम आ सकता है क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको कुतुब मीनार के बारे में सभी प्रकार की जानकारी देंगे। इसके साथ ही साथ हम आपको बताएंगे कि कुतुब मीनार की लंबाई कितनी है, Qutub Minar Ki Lambai Kitni Hai, कुतुब मीनार कहां पर है?

कुतुब मीनार का इतिहास:

यदि आपको तो मीनार के बारे में सभी प्रकार की जानकारी चाहते हैं तो सबसे पहले आपको इसका इतिहास जानना होगा। क़ुतुब मीनार का निर्माण कार्य दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1193 में शुरू कराया था। लेकिन कुतुबुद्दीन ऐबक के शासनकाल में सिर्फ इसका आधार और पहला तल ही बन पाया था। इसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक के उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने इसमें तीन मंजिल और बनवाया। इसीलिए यदि आपसे कोई व्यक्ति पूछे कि क़ुतुब मीनार की नींव किसने रखी थी तो आप उसे कुतुबुद्दीन ऐबक बताएं। लेकिन यदि कोई व्यक्ति आपसे यह पूछा कि कुतुबमीनार का संपूर्ण निर्माण किसने कराया तो इसके दो उत्तर हैं- पहला इल्तुतमिश और दूसरा फिरोज़ शाह तुगलक। दरअसल फिरोजशाह तुगलक ने 1368 में कुतुब मीनार की पांचवीं और छठी मंजिल बनवाई थी।

कुतुबमीनार को बनाने में लाल बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है जिस पर कुरान की आयतें और फूल-बेलों की महीन नक्काशी की गई है। यह मीनार आज भी देखने में काफी खूबसूरत दिखाई देता है। इतिहास में ऐसा लिखा गया है कि कुतुबमीनार को अफगानिस्तान में स्थित जाम की मीनार से प्रेरित होकर बनाया गया है। कुतुबुद्दीन ऐबक ने जाम की मीनार से आगे निकलने के लिए कुतुब मीनार का निर्माण करवाया। यह लाल और बफ सेंड स्टोन से बनी भारत की सबसे ऊंची मीनार है।

कुतुब मीनार की ऊंचाई कितनी है? / क़ुतुब मीनार की लम्बाई

लगभग 750 साल पहले बनी क़ुतुब मीनार भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है। आधार पर इसका व्यास 14.32 मीटर और 72.5 मीटर की ऊंचाई पर शीर्ष के पास लगभग 2.75 मीटर है। यानी यदि आप से कोई व्यक्ति पूछे कि कुतुब मीनार की ऊंचाई (qutub minar ki lambai) कितनी है तो आपका जवाब 72.5 मीटर रहेगा। कुतुबमीनार भारत की सबसे ऊंची मीनार है।

गुलाम वंश के पहले शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1199 में इस मीनार की नींव रखी थी और लोगों से यहां पर नमाज अदा करने की अपील की थी। इसी समय इसकी पहली मंजिल बनकर तैयार हुई थी। इसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्तुतमिश जिसने दिल्ली पर 1211 से लेकर 1236 तक हुकूमत की, ने इसमें तीन और मंजिलें बनवाई। यदि आप कुतुबमीनार को ध्यान से देखेंगे तो इसके सभी मंजिलों के चारों ओर छज्जे बने हुए हैं जो मीनारों को खेलते हैं। इन छज्जों को पत्थरों का ब्रैकेट बनाकर सहारा दिया गया है। इन छज्जों पर मधुमक्खी के छत्ते की तरह सजावट की गई है। पहली मंजिल पर आप इस तरह की सजावट को और भी स्पष्ट तरीके से देख सकते हैं।

कुतुब मीनार कहां पर है?

क़ुतुब मीनार भारत की राजधानी दिल्ली के दक्षिण में महरौली वाले भाग में स्थित है। इसके उत्तर पूर्व में कुवत उल इस्लाम मस्जिद भी बनाया गया है जहां पर नमाज अदा किया जाता था। यह मस्जिद दिल्ली के सुल्तानों द्वारा निर्मित कराई गई सबसे पुरानी मस्जिद है जो अब ढह चुकी है।

इस मस्जिद के किनारे किनारे नक्काशी वाले कमरे बनाए गए हैं और उस से घिरा हुआ एक आयताकार आंगन भी बना हुआ है। इस मंदिर में जिस भी वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया है वह सभी 27 हिंदू एवं जैन मंदिरों से प्रेरित होकर लिया गया है। इन मंदिरों को कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा नष्ट कर दिया गया था। यदि आप किस का विवरण जानना चाहते हैं तो मुख्य पूर्वी प्रवेश पर खोदे गए शिलालेख में इसका उल्लेख है।

कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद इल्तुतमिश ने इस मस्जिद को और भी बड़ा बनाने के लिए एक बड़ा अर्ध गोलाकार पर्दा खड़ा किया। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने भी इस मस्जिद को बड़ा बनाने के लिए कई सारे कार्य करवाए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अलाउद्दीन खिलजी ने 1210 से लेकर 1235 तक दिल्ली पर शासन किया।

अलाई मीनार कहाँ पर है?

यदि आप कुतुब मीनार देखने दिल्ली पहुंचे हैं तो उसके उत्तर में स्थित अलाई मीनार भी स्थित है जिसे अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब मीनार से भी दुगने आकार का बनाने के इरादे से शुरू कराया था। लेकिन किसी कारणवश यह मीनार पूरा तैयार नहीं हो सका और सिर्फ इसकी पहली मंजिल ही पूरी हो सकी। इसके पहली मंजिल का आधार सहित ऊंचाई 25 मीटर है।

कुतुब मीनार से संबंधित विवाद:

बहुत सारे लोग ऐसा मानते हैं कि कुतुब मीनार को कुतुबुद्दीन ऐबक ने नहीं बनाया था बल्कि यह मीनार उसके पहले से भी यहां पर खड़ी थी। चुकी मुस्लिम शासकों ने बहुत सारे मंदिरों को तोड़ने का काम किया और साथ ही साथ उन्होंने कई भारतीय भवनों को तोड़ने और उसका निर्माण करा कर उसे अपना नाम दिया। इसीलिए समय-समय पर क़ुतुब मीनार को लेकर विवाद खड़ा होता रहता है। बहुत सारे लोग ऐसा कहते हैं कि इससे पहले विजय की मीनार कहीं जाती थी।

कुछ लोगों ने कुतुबमीनार में पूजा अर्चना करने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान समय में हम जिस जगह को मेहरौली के नाम से जानते थे उसे पहले किसी दूसरे नाम से जाना जाता था। दरअसल मेहरौली का पुराना नाम मिहिरावली हुआ करता था। इस जगह को चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक वाराह्मीहिर ने बसाया था। बहुत सारे लोग यह भी मानते हैं कि इस विशाल स्तंभ का निर्माण वाराह मिहिर ने ग्रहों की गति के अध्ययन के लिए कराया था। इसे पहले ध्रुव स्तंभ या मेरु स्तंभ के नाम से जाना जाता था। हालांकि अलग-अलग शासकों के समय में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जिसके चलते सच्चाई का पता आज भी नहीं लग सका है।

पिछले साल दिसंबर महीने में भगवान विष्णु और जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के नाम से कुतुब मीनार के अंदर पूजा पाठ करने की इजाजत मांगने के लिए दिल्ली के साकेत कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शुरू हुई थी। इस याचिका में यह कहा गया था कि कुतुब परिसर में कुवत उल इस्लाम मस्जिद में मुसलमानों द्वारा कभी भी नमाज नहीं पढ़ी गई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस मस्जिद को 27 जैन एवं हिंदू मंदिरों को नष्ट करके उसके मलबे से बनाया गया था। इसीलिए इस मस्जिद के खंभों, मेहराबों, दीवार और छत पर जगह-जगह हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां बनी हुई थीं। वर्तमान समय में भी आप इसे देख सकते हैं।

27 नक्षत्रों के प्रतीक के तौर पर बनाए गए थे 27 अलग-अलग मंदिर:

कुतुब परिसर में 27 नक्षत्रों के प्रतीक के तौर पर 27 अलग-अलग मंदिर बनाए गए थे। यह मंदिर जैन तीर्थंकरों के साथ-साथ भगवान विष्णु शिव एवं गणेश जी के मंदिर थे। यदि आप इतिहास के पन्ने पलट कर देखें तो आपको यह सभी जानकारी मिल जाएंगी। इसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने जब दिल्ली में कदम रखा तो उसने इसे नष्ट करने का आदेश दे दिया। इसके बाद इस मंदिरों के मलबे से मस्जिद का निर्माण किया गया जिसे आज कुवत उल इस्लाम मस्जिद के नाम से जाना जाता है।

निष्कर्ष

दोस्तों हमने आपको यह आर्टिकल के माध्यम से बताया कि कुतुब मीनार की लंबाई कितनी है। अगर आपके मन में भी क्वेश्चन था कि आखिर का कुतुब मीनार की लंबाई कितनी होती है। तो आशा करता हूं कि आप को इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपके इस क्वेश्चन का जवाब जरूर मिल गया होगा।

आशा करता हूं कि आपको हमारा यह आर्टिकल अवश्य पसंद आया होगा। अगर आप ऐसे ही इंटरेस्टिंग टॉपिक पर और आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं तो आप हमारी इस वेबसाइट को बुकमार्क अवश्य करें धन्यवाद।

 

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