लोकतंत्र क्या है? लोकतंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

लोकतंत्र क्या है | लोकतंत्र का अर्थ बताइए | लोकतंत्र कितने प्रकार के होते हैं | लोकतंत्र का अर्थ एवं परिभाषा | लोकतंत्र का महत्व | भारत में लोकतंत्र का इतिहास

आप सभी लोगों ने लोकतंत्र शब्द को कई बार सुना होगा। राजनीतिक क्षेत्र में लोकतंत्र शब्द का प्रयोग कई बार किया जाता है। अक्सर अपने नेताओं को लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक अधिकार के बारे में बात करते हुए सुना होगा। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जिसमें भारत के नागरिकों को मतदान द्वारा शासनात्मक प्रतिनिधि चुनने का अधिकार दिया गया है।

हालांकि बहुत सारे लोग लोकतंत्र शब्द को सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र से जोड़ कर देखते हैं जबकि ऐसा नहीं है। राजनीति के अलावा लोकतंत्र का सिद्धांत दूसरे समूहों और संगठनों पर भी लागू हो सकता है। सीधे तौर पर कहा जाए तो  अलग-अलग क्षेत्रों में लोकतंत्र को अलग-अलग पैमाने पर मापा जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि लोकतंत्र क्या है? लोकतंत्र का अर्थ बताइए, लोकतंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

लोकतंत्र क्या है?

राजनीतिक संदर्भ में कहा जाए तो लोकतंत्र एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसके अंतर्गत जनता को अपना मत देकर प्रतिनिधि चुनने का अधिकार दिया गया है। ऐसे देश जिनमें नागरिकों को मत देने का अधिकार दिया गया है उसे लोकतांत्रिक देश कहा गया है। लोकतांत्रिक देश में एक निश्चित उम्र सीमा से ऊपर आने वाले नागरिकों को मत देने का अधिकार मिलता है और वे अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपना प्रतिनिधि चुन सकते हैं। भारत भी एक लोकतांत्रिक देश है जिसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों को मत देने का अधिकार दिया गया है।

भारत के नागरिक पंचायत चुनाव, नगर निकाय चुनाव, विधान सभा चुनाव और आम चुनाव (संसदीय चुनाव) में मत देकर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। मत द्वारा चुने गए प्रतिनिधि अपने सर्वोच्च नेता का चुनाव करते हैं। जैसे यदि विधानसभा का चुनाव हुआ है और किसी दल के बहुमत की संख्या (दो तिहाई) से अधिक प्रत्याशी जीतते हैं, तो उस दल की राज्य में सरकार बन जाती है। यदि किसी दल को बहुमत नहीं मिलता है तो गठबंधन के द्वारा भी बहुमत सिद्ध किया जा सकता है। इसके बाद विधायक दल का नेता चुना जाता है और वह राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाता है। हालांकि राज्य का मुख्यमंत्री या देश का प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह तय करने का अधिकार जनता को नहीं दिया गया है।

लोकतंत्र को बेहतर तरीके से समझने के लिए इसकी परिभाषा जानना बहुत ही आवश्यक है। भारत के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र को परिभाषित करते हुए कहा था कि, “लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है।” किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता को अपनी मर्जी से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की छूट दी गई है। इसके साथ ही साथ इस शासन व्यवस्था में सभी व्यक्ति को समान अधिकार एवं सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक स्वतंत्रता के साथ साथ राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक न्याय की व्यवस्था भी की जाती है।

लोकतंत्र का अर्थ बताइए / लोकतंत्र का अर्थ एवं परिभाषा:

लोकतन्त्र 2 शब्दों से मिलकर बना है, “लोक + तन्त्र”। लोक का अर्थ है जनता और तंत्र का अर्थ है शासन। अर्थात लोकतंत्र को जनता का शासन के रूप में भी समझा जा सकता है। लोकतंत्र को प्रजातंत्र भी कहा जाता है। क्योंकि प्रजा एवं लो क दोनों शब्द का अर्थ जनता ही होता है। इसके अलावा लोकतंत्र को अंग्रेजी में Democracy कहा जाता है जो ग्रीक भाषा के ‘Demos’ और ‘Cracy’ शब्द से मिलकर बना है। इसमें Demos शब्द का अर्थ जन साधारण और Cracy शब्द का अर्थ शासन है।

लोकतंत्र को लेकर अलग-अलग विशेषज्ञों ने अपनी अलग-अलग परिभाषाएं दी हैं। इसमें अब्राहम लिंकन के संक्षिप्त परिभाषा को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है क्योंकि उनके इस परिभाषा से कोई भी व्यक्ति बड़े ही आसानी से यह समझ सकता है कि लोकतंत्र का अर्थ ‘जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए शासन’ है। हालांकि जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का मानना है कि लोकतंत्र में सिर्फ जनता को भ्रमित करके यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह शासक है, जबकि असली सत्ता कुछ गिने-चुने व्यक्तियों के पास ही होती है और वह अपने इच्छा अनुसार कोई भी काम करते हैं।

भारत के संदर्भ में संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉ० भीमराव अंबेडकर ने लोकतंत्र के सफलतापूर्वक संचालन के लिए 22 दिसंबर 1952 को पूना डिस्ट्रिक्ट लॉ लाइब्रेरी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, “लोकतंत्र सरकार का वह स्वरूप एवं पद्धति है, जिसके जरिए जनता के सामाजिक और आर्थिक जीवन में बिना खून-खराबे के क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है।”

लोकतंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि  दुनिया के 56 देशों में  लोकतांत्रिक प्रणाली है, जबकि देशों में निरंकुश शासन व्यवस्था है। लोकतंत्र मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- 1. प्रतिनिधि लोकतंत्र और 2. प्रत्यक्ष लोकतंत्र

  1. प्रतिनिधि लोकतंत्र:

प्रतिनिधि लोकतंत्र में जनता अपने मत का प्रयोग करके प्रतिनिधि चुनती है, जो किसी पंचायत, नगर, विकास खंड, जिला, विधानसभा एवं संसदीय, इत्यादि स्तर पर चुने जाते हैं। इसलिए आपसे यह कहा जा सकता है कि प्रतिनिधि लोकतंत्र में जनता द्वारा प्रतिनिधि निर्वाचित किए जाते हैं लेकिन जनता के हित में कार्य करने के लिए कौन सी नीतियां बनाएंगे, वे स्वयं तय करते हैं। प्रतिनिधि लोकतांत्रिक देशों में एक निश्चित अवधि के बाद चुनाव कराए जाते हैं। ऐसे देशों में नीतिगत फैसलों पर समर्थन देने का अधिकार सिर्फ जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के पास ही होता है।

हालांकि जॉन बर्नार्ड शॉ ने लोकतंत्र से संबंधित अच्छी परिभाषा दी थी क्योंकि इसमें जनता को सिर्फ मत देने का अधिकार दिया गया है। इसके बाद उनके द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि अपने अनुरूप ही कार्य करने लगते हैं। हालांकि निर्धारित अवधि के बाद जनता फिर से अपने मताधिकार का प्रयोग करके उस प्रतिनिधि को हटाकर किसी दूसरे प्रतिनिधि को चुन सकती है। लोकतांत्रिक देशों में वंचितों एवं शोषितों के सशक्तिकरण के लिए कार्य किया जाता है ताकि देश का विकास हो सके। इसके साथ ही साथ जनता को कई प्रकार की बुनियादी सुविधाओं का लाभ भी दिया जाता है।

  1. प्रत्यक्ष लोकतंत्र:

प्रत्यक्ष लोकतंत्र में देश के नागरिकों को प्रतिनिधि लोकतंत्र से काफी अधिक शक्ति मिलती है। छोटे समुदाय एवं नगर राष्ट्रों में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की व्यवस्था की जाती है। प्रत्यक्ष लोकतंत्र में देश के नागरिकों को सरकार द्वारा किए जाने वाले सभी नीतिगत फैसलों पर मतदान करने का अधिकार होता है। पूरे विश्व में सिर्फ एक देश इसका उदाहरण है वह स्विट्जरलैंड। इस देश में किसी नीतिगत फैसलों को तब मंजूरी मिलती है, जब उस देश की जनता द्वारा स्पष्ट बहुमत मिले।

लोकतंत्र का महत्व:

किसी भी देश में लोकतंत्र का बहुत ही अधिक महत्व है क्योंकि इसमें जनता को कई सारे अधिकार मिले होते हैं। जनता द्वारा डाले गए वोट के जरिए ही नेता चुने जाते हैं। यदि चुना गया नेता 5 सालों में अच्छा काम नहीं करता है तो अगले चुनाव में जनता को उस नेता के विपक्ष में वोट डालकर उसे हरा सकती है। नीचे हम आपको लोकतंत्र का महत्व बताने जा रहे हैं।

  1. सत्ता के मनमानी कार्यों पर नियंत्रण

पाली के समय में जब राज्य शाही सत्ता होती थी तब जनता उसके मनमानी कार्यों पर नियंत्रण नहीं रख सकती थी। लेकिन लोकतंत्र होने के चलते जनता सत्ता के मनमानी कार्यों पर नियंत्रण कर सकती है। वह सत्ता का दुरुपयोग करने वाले लोगों के खिलाफ आंदोलन कर सकती है और अगले चुनाव में उसके खिलाफ वोट डालकर सबक भी सिखा सकती है। इसीलिए सत्तासीन लोगों में हमेशा जनता का भय बना रहता है।

  1. जनता का हित:

लोकतांत्रिक देश होने के चलते सत्ता में बैठे लोग जनता के हित में कार्य करने की पूरी कोशिश करते हैं। क्योंकि लोकतंत्र में जनता की पूरी भागीदारी होती है। यदि वे जनता का अहित करते हैं तो इससे जनता उनके खिलाफ जा सकती है। पहले के समय में शासक अपने देश की जनता के साथ कोई भी अत्याचार कर सकते थे और कोई भी उनकी खिलाफत नहीं कर सकता था, लेकिन लोकतंत्र में ऐसा नहीं है।

  1. नागरिकों के साथ समान भावना:

लोकतंत्र में सरकार सभी नागरिकों के साथ समान भावना बना कर रखती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार के लिए देश के सभी नागरिक एक समान होते हैं। यहां पर सरकार द्वारा जो भी योजनाएं लागू की जाती हैं वह सभी नागरिकों के लिए समान होते हैं।

  1. नागरिकों में आत्मविश्वास:

लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार चुनने का अधिकार होता है, इसीलिए उनके मन में आत्मविश्वास होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि उनके द्वारा चुना गया नेता जनता के हित के लिए कार्य नहीं करता है तो वह उसे अगले चुनाव में हराकर पद से हटा सकते हैं।

  1. देशभक्ति की भावना का विकास:

पहले के समय में जब राजशाही शासन होता था तो नागरिकों के मन में सिर्फ अपने राजा के लिए भक्ति की भावना होती थी। इतना ही नहीं यदि कोई राजा उनका शोषण करता था तो वे राजा का विरोध तक नहीं कर सकते थे। लेकिन लोकतंत्र के चलते लोगों के अंदर देशभक्ति की भावना का विकास होता है क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि वह खुद देश का शासन चला रहे हैं और किसी भी सरकार को बनाना और हटाना जनता के हाथ में ही है। इसीलिए वे अपने देश को पहली प्राथमिकता देते हैं और उसी के अनुसार सरकार चुनते हैं।

  1. शिक्षा के विकास को महत्व:

किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार शिक्षा के विकास को काफी मात्र देती है ताकि इससे देश का विकास हो सके। यदि किसी देश में शिक्षित लोगों की कमी है तो उस देश का विकास कभी भी संभव नहीं है। इसलिए देश की सरकार गरीब से गरीब लोगों को अच्छी शिक्षा देने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाती हैं।

  1. आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा:

किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता को आर्थिक सुरक्षा भी दी जाती है। इसीलिए सरकार अपने देश के नागरिकों को बहुत सारी ऐसी योजनाएं चलाकर लाभ देती है जिसमें उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। इसके साथ ही साथ सरकार अपने देश को आर्थिक क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए देश के पढ़े लिखे नागरिकों को वित्तीय सहायता भी देती है।

  1. कुशल शासन प्रणाली:

लोकतांत्रिक देश में सरकार बहुत दिनों तक जनता की मांग को अनसुना नहीं कर सकती है। क्योंकि उसे अगले चुनाव में जनता के वोट भी लेने होते हैं। इतना ही नहीं लोकतंत्र में जनता को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार का विरोध करने का भी अधिकार मिला हुआ है। यदि देश की सरकार जनता की मांग को अनसुना कर सकती है, तो इसका विरोध करने के लिए जनता सड़कों पर उतर सकती है।

  1. परस्पर सद्भावना का विकास:

लोकतांत्रिक देश में नागरिकों के बीच परस्पर सद्भावना का विकास होता है। क्योंकि इसमें देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले होते हैं। यहां पर आपको भी वही अधिकार मिलते हैं जो देश के समृद्ध लोगों को मिलते हैं। लोकतंत्र में देश के सभी नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार दिए गए होते हैं जो सबके लिए लागू होते हैं।

  1. सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय:

लोकतंत्र में सरकार का काम सबके हित और सब के सुख के लिए कार्य करना होता है। यदि सरकार किसी भी प्रकार की कोई योजना बनाती है तो उसमें देश के सभी नागरिकों का हित शामिल होता है। योगी सरकार कोई ऐसी योजना बनाती है जिसमें जनता का हित हो तो जनता इसका विरोध कर सकती है और अगले चुनाव में उसे खराब हो सकती है। इसीलिए लोकतांत्रिक देश की सरकार का उद्देश्य सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का होता है।

भारत में लोकतंत्र का इतिहास:

आजादी से पहले भारत में पहले राजशाही शासन चलता था, लेकिन 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद इस देश को एक लोकतांत्रिक देश बनाने की घोषणा की गई और अलग-अलग रियासतों को भारत में मिलाया गया। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद भारत को लोकतांत्रिक देश का दर्जा मिला जिसमें नागरिकों को कई सारे अधिकार भी मिले, जिसमें वोट का अधिकार भी शामिल था।

1951 को पहली बार संसदीय चुनाव आयोजित कराए गए जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला और पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। भारत में 5-5 वर्षों के अंतराल में लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव आयोजित कराए जाते हैं और इसमें जनता अपना वोट डालकर अपने क्षेत्र का नेता चुनती है। लोकतंत्र में कोई भी सरकार बनाने के लिए  दो तिहाई बहुमत  आवश्यक होता है। यदि किसी पार्टी के पास दो तिहाई बहुमत  नहीं है तो वह  अन्य दलों से गठबंधन करके संसद या विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर सकती है।

 

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