सिक्किम का इतिहास: History of Sikkim in Hindi

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यदि आप भारत में रहते हैं तो आपको सिक्किम राज्य के बारे में अवश्य ही मालूम होगा। बहुत सारे लोग पर्यटन करने के उद्देश्य से सिक्किम जाते हैं। भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित सिक्किम एक पर्वतीय राज्य है, जो अपनी अलग संस्कृति के लिए जाना जाता है। इसीलिए पर्यटकों को यहां जाना काफी पसंद है। इस राज्य की खूबसूरत वादियां और पहाड़ लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

यदि आप सिक्किम के बारे में जानकारी (Sikkim Details in Hindi, Sikkim Ke Bare Mein Jankari, Sikkim Ki Jankari, Sikkim Ke Bare Mein) प्राप्त करना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके बहुत ही काम आ सकता है क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको सिक्किम का इतिहास (Sikkim History in Hindi, Sikkim Ka Itihaas, History Of Sikkim In Hindi) बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही साथ हम इस राज्य के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी बात करेंगे।

सिक्किम के बारे में जानकारी | Sikkim Details In Hindi

यदि आप सिक्किम के बारे में जानकारी (Sikkim Ke Bare Mein Jankari, Sikkim Details in Hindi) प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको बता दें कि सिक्किम राज्य भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित है, जो पहाड़ों पर बसा हुआ है। इस राज्य की सीमा 3 देशों से लगती है, जिसमें पूर्व और उत्तर की तरफ तिब्बत, पश्चिम में नेपाल और दक्षिण-पूर्व में भूटान देश की सीमा शमिल हैं। इसके अलावा इसके दक्षिण की ओर भारत का पश्चिम बंगाल राज्य स्थित है।

सिक्किम के बारे में (Sikkim Ke Bare Mein) एक और चीज जानने लायक है, वह यह है कि अलग-अलग देशों से घिरे होने के कारण यहां पर अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं, इसीलिए इस राज्य की 6 अधिकारिक भाषाएं हैं, जिसमें अंग्रेजी, लेप्चा, गोर्खाली खस, भुटिया, लिंबू और हिंदी शामिल हैं। इस राज्य में हिन्दू और बज्रयान बौद्ध धर्म को मानने वाले अधिक लोग रहते हैं। सिक्किम की राजधानी गंगटोक है, जो इस राज्य का सबसे बड़ा शहर है।

सिक्किम की जानकारी (Sikkim Ki Jankari) के क्रम में आपको यह जानना भी आवश्यक है कि सिक्किम शब्द लिंबू भाषा के सु और ख्यिम शब्द से मिलकर बना हुआ है, जिसका अर्थ है: नया महल। इस राज्य के पहले राजा फुन्त्सोक नामग्याल द्वारा बनाए गए नए महल को लिम्बू भाषा में सुख्यिम कह के पुकारा जाता था। इसी के नाम से इस प्रदेश का नाम सिक्किम रख दिया गया। तिब्बती भाषा में सिक्किम शब्द का अर्थ चावल की घाटी होता है।

Sikkim Details in Hindi: सिक्किम गोवा के बाद भारत का दूसरा सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है। विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा सिक्किम राज्य के उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित है। प्रकृति की सुंदरता के चलते सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि देश दुनिया से बहुत सारे लोग यहां पर पर्यटन करने के लिए आते हैं। इस के अगल-बगल के देश भूटान और नेपाल में भारतीयों को जाने के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं होती है इसीलिए बहुत सारे लोग सिक्किम के रास्ते नेपाल और भूटान की यात्रा भी करते हैं। यह दोनों देश पर्यटन के लिए भी बहुत अधिक प्रसिद्ध हैं।

सिक्किम का इतिहास / Sikkim history in hindi / History of Sikkim in hindi:

आठवीं शताब्दी में बौद्ध भिक्षु गुरु रिन्पोचे जिन्हें हिंदी भाषा में पद्मसंभव कहा जाता है, बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए सिक्किम गए थे। इस घटना से पहले सिक्किम प्रदेश का कहीं भी कोई उल्लेख नहीं मिलता है। उन्होंने सिक्किम के रास्ते ही तिब्बत और भूटान में बौद्ध धर्म का काफी प्रचार प्रसार किया। तिब्बती बौद्ध धर्म के 5 प्रमुख शाखाओं में से एक ञिङमा (Nyingma) संप्रदाय के अनुयाई उन्हें दूसरा महात्मा बुद्ध मानते हैं।

1642 में पूर्वी तिब्बत में खाम के मिन्यक महल के एक राजकुमार ख्ये बुम्सा के 5वें वंशज फुन्त्सोंग नामग्याल को उत्तर, पूर्व और दक्षिण से आए 3 बौद्ध भिक्षुओं ने यहां का चोग्याल घोषित किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चोग्याल का हिंदी अर्थ राजा होता है। उस समय सिक्किम की राजधानी युक्सोम थी।

इसके बाद 1670 में उनके पुत्र तेन्सुंग नामग्याल चोग्याल (राजा) बने और रबदेन्त्से को अपनी राजधानी बना ली। 1700 में तेंसुंग की सौतेली बहन ने सिक्किम पर आक्रमण कर दिया, लेकिन इसमें राजा की जीत हुई। इसके बाद 1717 से 1733 तक आसपास के देशों नेपाल और भूटान के शासकों ने सिक्किम पर कब्जा जमाने के लिए कई सारे आक्रमण किए जिसके चलते रबदेन्त्से राजधानी का पतन हो गया।

साल 1791 में सिक्किम ने चीन की सेना की मदद से गोरखा नेपालियों को हरा दिया और फिर किंग डायनेस्टी का एक अंग बन गया। जब भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब्जा किया तब सिक्किम ने नेपाल के खिलाफ लड़ने के लिए ब्रिटिश सरकार से हाथ मिला लिया। इसके बाद नेपाल ने सिक्किम पर आक्रमण करके उसके तराई क्षेत्र वाले भागों को जीत लिया। अब ब्रिटिश सेना ने सिक्किम का साथ देने के लिए नेपाल पर आक्रमण कर दिया और 1814 में गोरखा युद्ध हुआ। इस युद्ध में अमर सिंह थापा, बलभद्र कुँवर और भक्ति थापा के शौर्य की काफी चर्चा हुई।

इस युद्ध के बाद 1816 में सिक्किम और नेपाल के बीच सुगौली की संधि हुई और फिर अंग्रेजों और सिक्किम के बीच 1817 में तितालिया की संधि हुई, जिसके बाद सिक्किम के अधिकृत क्षेत्र को उसे वापस लौटा दिया। हालांकि इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने मोरांग प्रदेश में कर लगा दिया, जो सिक्किम राज्य के लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। इसके बाद अंग्रेज अधिकारी सर जोसेफ डाल्टन और डाक्टर अर्चिबाल्ड बिना सिक्किम कि राजा की अनुमति के वहां चले गए, जिसके बाद उन्हें बंदी बना लिया गया। इसके बाद अंग्रेजी हुकूमत और सिक्किम के बीच युद्ध छिड़ गया। फलस्वरूप सिक्किम के राजा की हार हुई और ब्रिटिश हुकूमत ने उसे अपने कब्जे में लेकर 1835 में भारत में मिला दिया।

1947 के बाद सिक्किम का इतिहास (History Of Sikkim After 1947)

1947 में आजादी मिलने के बाद सरदार पटेल ने भारत के अलग-अलग रियासतों से बात करके और उन्हें समझा-बुझाकर भारत के साथ विलय करने के लिए मनाना शुरू कर दिया। इसी के साथ सर्वसम्मति से सिक्किम राज ने भारत में विलय होने का फैसला किया और उसे संरक्षित राज्य का भी दर्जा दिया गया। इसका मतलब यह था कि सिक्किम राज्य में पुराने नामग्याल राजतंत्र का शासन होगा और भारत उसे संरक्षित करने का काम करेगा। लेकिन इसके साथ- साथ विदेशी, राजनयिक और संपर्क संबंधी सभी अधिकार भारत के पास रहेंगे।

हालांकि 1955 में एक राज्य परिषद स्थापित करके सिक्किम के राजा को एक संवैधानिक सरकार बनाने के लिए कहा गया। इसके बाद सिक्किम नेशनल कांग्रेस ने पुनः मतदान की मांग करना शुरू कर दिया और इसके साथ ही साथ नेपाली समुदाय के लोग अपना अधिक प्रतिनिधित्व मांग रहे थे, जिसके चलते काफी विवाद खड़ा हो गया। 1973 में राज भवन के सामने दंगे शुरू हो गए और इसके चलते सिक्किम के राजा ने भारत सरकार से संरक्षण मांगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उस समय सिक्किम राज्य में बाहर के लोगों का आना जाना पूरी तरह से वर्जित था। इसीलिए दुनिया में सिक्किम राज्य को कोई भी नहीं जानता था। उस समय प्रदेश में अपनी अपनी मांग को लेकर दंगे शुरू हो गए थे और नामग्याल राजतंत्र का शासन पूरी तरह से विफल हो चुका था। वहां की जनता किसी तरह से इस राजतंत्र से छुटकारा पाना चाहती थी और भारत के साथ जुड़ना चाहती थी ताकि उन्हें भी लोकतांत्रिक अधिकार और सभी प्रकार की सुविधाएं भी मिल सके।

जब भारत सरकार ने सिक्किम राज्य की स्थिति देखी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री ने संसद में सिक्किम राज्य को पूरी तरह से भारत में मिलाकर उसे संसद में प्रतिनिधित्व देने का अनुरोध किया। संसद से मंजूरी मिलने के बाद अप्रैल 1975 में भारतीय सेना ने गंगटोक में प्रवेश किया और वहां कि सेना को झुकने पर विवश कर दिया। मात्र 2 दिनों के अंदर उन्होंने पूरे सिक्किम राज्य को अपने कब्जे में ले लिया।

सिक्किम राज्य को भारतीय गणतंत्र में मिलाने के लिए वहां के 97.5% निवासियों ने समर्थन दिया था। इसके बाद 16 मई 1975 को सिक्किम भारतीय गणराज्य का औपचारिक रूप से 22वाँ राज्य बन गया। हालांकि आज भी सिक्किम राज्य को कई सारे विशेषाधिकार दिए गए हैं लेकिन उस पर पूरी तरह से भारत सरकार का शासन चलता है। भारत ने बनाया गया कोई भी कानून सिक्किम राज्य में भी लागू होता है। हालांकि वहां के नागरिकों को अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने के लिए कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं।

1642 में नामग्याल राजवंश का शासन शुरू हुआ और यह लगभग 333 सालों तक चला। इसके बाद 6 अप्रैल 1975 को भारतीय सेना ने सिक्किम के राजमहल के 243 सैनिकों पर नियंत्रण कर के वहां के राजा को उसके ही राजमहल में नजरबंद कर दिया। इसके बाद सिक्किम में हुए जनमत संग्रह में 97.5% लोगों ने भारत में शामिल होने के पक्ष में मत दिया। इसके बाद 23 अप्रैल 1975 को 36वाँ संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया और यह 299-11 के मत से पास हुआ।

26 अप्रैल को राज्यसभा में इस बिल के पास होने के बाद 15 मई 1975 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इस बिल पर हस्ताक्षर किया और इसी के साथ सिक्किम भारत का 22 वां राज्य बन गया। सिक्किम के भारत का 22वां राज्य बनने के साथ ही साथ यहां से नामग्याल राजवंश का शासन समाप्त हो गया और यह एक लोकतांत्रिक राज्य बन गया।

 

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