Harit Kranti Kya Hai in Hindi: भारत में हरित क्रांति के जनक

हरित क्रांति क्या है | भारत में हरित क्रांति के जनक | भारत में हरित क्रांति की शुरुआत कब हुई | हरित क्रांति का संबंध किस क्षेत्र से है

हरित क्रांति का भारतीय कृषि पर काफी प्रभाव पड़ा क्योंकि स्वतंत्रता के बाद भारत में भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई थी और देश के बहुत सारे लोग इसका शिकार हो रहे थे। भारत ने जब विकसित देशों से खाद्यान्न की कमी को पूरा करने के लिए मदद मांगी तो उन्होंने बदले में निम्न कोटि का खाद्यान्न भेजना शुरू कर दिया था। शायद आप सभी ने हरित क्रांति के बारे में सुना होगा। दरअसल यह कृषि का विकास करने के लिए शुरू की गई एक ऐसी योजना थी, जिसने पूरे विश्व में कृषि के विकास को एक नया आयाम दिया। सबसे पहले हरित क्रांति की शुरुआत अमेरिका में हुई थी, इसके बाद यह भारत और अन्य देशों में भी पहुंचा। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि हरित क्रांति क्या है, हरित क्रांति का इतिहास भारत में हरित क्रांति के जनक, भारत में हरित क्रांति की शुरुआत कब हुई, हरित क्रांति का संबंध किस क्षेत्र से है?

हरित क्रांति का संबंध किस क्षेत्र से है?

हरित क्रांति का संबंध कृषि एवं उससे संबंधित उत्पादों से है। विश्व में सबसे पहले अमेरिका में हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी, जो धीरे-धीरे विश्व के अलग-अलग देशों में शुरू की गई और कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसके नियमों का अनुसरण किया गया। सिर्फ भारत या अमेरिका में ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी हरित क्रांति ने कृषि को काफी अधिक बढ़ावा दिया। हरित क्रांति के बाद ही भारत एक कृषि संपन्न राष्ट्र बन सका और वर्तमान समय में आज भारत कई कृषि उत्पादों एवं खाद्यान्नों का सबसे बड़ा निर्यातक भी बन चुका है। कुछ मामलों में यह दूसरे या तीसरे नंबर पर भी आता है।

हरित क्रांति क्या है?

1960 के दशक में कृषि के विकास के लिए अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग द्वारा हरित क्रांति की शुरुआत की गई थी। इस क्रांति में अच्छी उपज देने वाले किस्म के बीजों का प्रयोग किया गया था जिसके चलते गेहूं और चावल के उत्पादन में काफी तेज से वृद्धि हुई। हरित क्रांति को सबसे पहले मैक्सिको और भारतीय उपमहाद्वीपों में सफलता मिली, क्योंकि यह देश पहले से ही कृषि आधारित थे और यहां पर काफी उपजाऊ जमीन भी होती थी, लेकिन अच्छी अच्छी उपज देने वाले किस्म के बीजों के अभाव में कृषि का खस्ता हाल था।

भारत में हरित क्रांति का नेतृत्व एमएस स्वामीनाथन ने किया था। उस समय भले ही भारत में कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा था, लेकिन अभी भी यहां पर खाद्यान्न की समस्या सबसे बड़ी हुआ करती थी। इस क्रांति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि 1967-68 से लेकर अगले एक दशक में भारत में न सिर्फ खाद्यान्न की कमी का अंत हुआ बल्कि यह खाद्यान्नों के उत्पादन वाला अग्रणी देश के रूप में बनकर भी उभरा। वर्तमान समय में भारत कृषि खाद्यान्नों के निर्यात में कई देशों से कहीं आगे है।

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत कब हुई?

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1966-67 में हुई थी, जिसका नेतृत्व कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने किया था। उनके नेतृत्व में भारत में कृषि क्षेत्र में काफी उपलब्धि हासिल की। हरित क्रांति में गेहूं का उत्पादन 3 गुना अधिक बढ़ गया, जबकि अन्य खाद्यान्न 2 गुना अधिक ही बढ़ पाए।

भारत में हरित क्रांति का इतिहास:

जब भारत आजाद हुआ तब यहां पर खाद्यान्न की सबसे बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसके लिए भारत ने विकसित देशों से मदद मांगी तो उन्होंने निम्न कोटि के खाद्यान्न भेजना शुरू कर दिया। इसीलिए जब पंडित जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की गई तो इसमें कृषि के विकास को सबसे अधिक महत्व दिया गया और इससे संबंधित कई योजनाएं भी शुरू की गई। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद एक बार फिर से भारत पर आर्थिक संकट आ गया। उस समय भारत कृषि पर काफी अधिक निर्भर हुआ करता था। तभी अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग ने अधिक उपज देने वाले किस्म के बीजों की खोज करना शुरू कर दिया। धीरे धीरे इनका इस्तेमाल भारत में भी किया जाने लगा।

चौथी पंचवर्षीय योजना 1969 से लेकर 1974 तक चली। भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1966-67 से मानी जाती है। इस योजना में सकल घरेलू उत्पाद के वृद्धि का लक्ष्य 5.6% रखा गया था जबकि सिर्फ 3.4% ही वास्तविक वृद्धि हो सकी। हालांकि इस सब के बीच बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए भारत-पाकिस्तान युद्ध के चलते भी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि पर असर पड़ा। लेकिन इस दौरान कृषि क्षेत्र में काफी विकास हुआ और इसका पूरा श्रेय हरित क्रांति को ही जाता है। 1966-67 से लेकर 1977-78 तक भारत एक कृषि संपन्न राष्ट्र बन चुका था और यह खाद्यान्न उत्पादन में विश्व के कई देशों से काफी आगे निकल चुका था।

भारत में हरित क्रांति के जनक:

भारत में हरित क्रांति का जनक एमएस स्वामीनाथन को माना जाता है। उन्होंने ही भारत में हरित क्रांति की रूपरेखा तैयार करते हुए इसका नेतृत्व किया था। 1967-68 से 1977-78 तक की हरित क्रांति का भारतीय कृषि पर काफी प्रभाव पड़ा और यह एक कृषि संपन्न राष्ट्र बन गया।

इसी की देन है कि आजादी के दौरान भूखमरी और अकाल जैसी समस्या झेल रहा भारत आज अनाजों का निर्यात करने में कई देशों से काफी आगे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता देंगे भारत में 2004 में एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार की शुरुआत भी की गई, जिसके तहत कृषि के क्षेत्र में आजीवन योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है।

विश्व में हरित क्रांति का जनक कौन है?

विश्व में हरित क्रांति का जनक नॉर्मन बोरलॉग को माना जाता है। यह एक अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक थे, जिन्हें 1970 में उच्च उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया था। इनके सम्मान में फर्टिलाइजर कम्पनी कोरोमंडल इंटरनेशनल ने 1972 में बोरलॉग पुरस्कार की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत भारतीय वैज्ञानिकों को उनके अनुसंधान एवं कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में योगदान के लिए पुरस्कृत दिया जाता है।

बोरलॉग पुरस्कार हासिल करने वाले व्यक्ति को ₹5,00,000 नकद, एक स्वर्ण पदक और एक प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। इसके अलावा Rockefeller Foundation द्वारा Dr. Norman Borlaug Field Award भी दिया जाता है।

Faq:

भारत में हरित क्रांति की शुरुआत कहां से हुई

पंजाब में 1960 के दशक में शुरू हुई

 

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